(N/A) पुष्पी पादपों में निषेचन-पश्च घटनाओं में वे सभी प्रक्रियाएं शामिल हैं जो युग्मकों के संलयन (संयुग्मन) के बाद युग्मनज (zygote) बनने के उपरांत होती हैं। ये घटनाएं बीज और फल के विकास के लिए आवश्यक हैं।
$1$. भ्रूणपोष का विकास: प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक $(PEN)$ क्रमिक केंद्रकीय विभाजन से गुजरता है जिससे मुक्त केंद्रक (मुक्त-केंद्रकीय भ्रूणपोष) बनते हैं। बाद में,कोशिका भित्ति का निर्माण होता है,जिससे यह कोशिकीय हो जाता है। यह विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है।
$2$. भ्रूण का विकास: युग्मनज समसूत्री विभाजन द्वारा प्रो-एम्ब्रियो बनाता है,जो बाद में गोलाकार,हृदयाकार और अंततः मूलांकुर और प्रांकुर युक्त परिपक्व भ्रूण में विकसित होता है।
$3$. बीज का निर्माण: बीजांड परिपक्व होकर बीज में बदल जाता है। बीजांड के अध्यावरण कठोर होकर बीज आवरण (बीजावरण और अंतःकवच) बनाते हैं।
$4$. फल का निर्माण: अंडाशय फल में विकसित होता है और अंडाशय की भित्ति फलभित्ति में परिवर्तित हो जाती है। बाह्यदल और पंखुड़ियों जैसे पुष्पीय भाग अक्सर सूखकर गिर जाते हैं।